महू हिंसा: चैंपियंस ट्रॉफी की जीत का जश्न दंगे में तब्दील, शहर काजी बोले- ‘कोई दूध का धुला नहीं’ (Mhow violence: Champions Trophy victory celebrations turn into riots, city Qazi says ‘no one is innocent’)
महू, मध्य प्रदेश: आईसीसी चैंपियंस ट्रॉफी 2025 में भारत की जीत का जश्न मध्य प्रदेश के महू कस्बे में रविवार देर रात हिंसा में बदल गया। इस दौरान दोनों समुदायों के बीच झड़पें हुईं, जिसमें चार लोग घायल हो गए और कई वाहनों को नुकसान पहुंचा। महू के शहर काजी मोहम्मद जाबिर ने इस घटना पर बयान देते हुए कहा, “दोनों तरफ से पत्थरबाजी हुई, कोई दूध का धुला नहीं है।” उनके अनुसार, “मुस्लिमों की दुकानें और गाड़ियां भी जलीं।”
कैसे भड़की हिंसा?
जानकारी के अनुसार, रविवार की रात भारत ने आईसीसी चैंपियंस ट्रॉफी में जीत दर्ज की, जिसके बाद महू के कई इलाकों में जश्न मनाया जा रहा था। इसी दौरान एक जुलूस मस्जिद के पास पहुंचा, जिसके बाद स्थिति तनावपूर्ण हो गई। चश्मदीदों के अनुसार, विवाद उस समय शुरू हुआ जब कुछ युवकों ने धार्मिक नारे लगाए और मस्जिद के पास पटाखे फोड़े।
स्थानीय लोगों का दावा है कि उकसावे की कार्रवाई के बाद दूसरे पक्ष ने भी प्रतिक्रिया दी और देखते ही देखते पत्थरबाजी शुरू हो गई। दोनों ओर से जमकर पथराव हुआ, जिससे कई दुकानों और वाहनों को नुकसान पहुंचा। हिंसा की सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची, लेकिन तब तक हालात बेकाबू हो चुके थे।
शहर काजी का बयान: “दूसरे पक्ष ने की शुरुआत”
महू के शहर काजी मोहम्मद जाबिर ने इस हिंसा पर अपनी प्रतिक्रिया दी और कहा कि यह घटना एकतरफा नहीं थी। उन्होंने दावा किया कि मस्जिद के पास जुलूस निकालना प्रतिबंधित था, फिर भी ऐसा किया गया। काजी के अनुसार, “मस्जिद के पास शरारत हुई और शुरुआत दूसरे पक्ष से हुई।”
उन्होंने आगे कहा, “यह मामला सिर्फ एक धर्म से जुड़ा नहीं है, बल्कि दोनों समुदायों की तरफ से झड़पें हुई हैं। इस घटना में मुस्लिमों की दुकानें और वाहन भी जलाए गए हैं, इसलिए किसी एक पक्ष को दोष देना गलत होगा।”
प्रशासन पर उठे सवाल
काजी मोहम्मद जाबिर ने प्रशासन की भूमिका पर भी सवाल खड़े किए। उन्होंने कहा, “प्रशासन को शायद अंदाजा नहीं था कि भारत और न्यूजीलैंड के मैच के बाद भी ऐसा हो सकता है। उन्हें तो सिर्फ भारत-पाकिस्तान मैच को लेकर सतर्कता बरतनी थी।” उन्होंने यह भी अपील की कि सभी पक्षों को शांति बनाए रखनी चाहिए और प्रशासन को निष्पक्ष कार्रवाई करनी चाहिए।
पुलिस की प्रतिक्रिया और कार्रवाई
महू पुलिस ने इस हिंसा को गंभीरता से लिया है और दोनों पक्षों से जुड़े 20 से अधिक लोगों को हिरासत में लिया गया है। पुलिस के मुताबिक, शहर में अतिरिक्त सुरक्षा बल तैनात कर दिए गए हैं और किसी भी तरह की अफवाह फैलाने वालों पर कड़ी नजर रखी जा रही है।
महू एसपी अनिल सिंह ने कहा, “स्थिति अब नियंत्रण में है। हमने शांति बनाए रखने के लिए पर्याप्त संख्या में पुलिस बल तैनात किया है और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।”
क्या हुआ घटना के बाद?
हिंसा के बाद महू के संवेदनशील इलाकों में तनाव बना हुआ है। प्रशासन ने शांति बनाए रखने के लिए पूरे क्षेत्र में धारा 144 लागू कर दी है, जिससे चार से अधिक लोगों के इकट्ठा होने पर पाबंदी लगाई गई है। सोशल मीडिया पर भी नजर रखी जा रही है, ताकि किसी तरह की अफवाहों को फैलने से रोका जा सके।
स्थानीय नेताओं और सामाजिक संगठनों ने भी लोगों से शांति बनाए रखने की अपील की है। दोनों समुदायों के गणमान्य लोगों की एक बैठक आयोजित की गई, जिसमें सभी से आपसी सौहार्द और भाईचारा बनाए रखने की अपील की गई।
क्या कहते हैं चश्मदीद?
इस घटना के चश्मदीदों के बयान भी महत्वपूर्ण हैं।
एक स्थानीय निवासी ने कहा, “हम भारत की जीत का जश्न मना रहे थे, लेकिन अचानक कुछ लोगों ने मस्जिद के सामने पटाखे फोड़ दिए और उकसावे वाली नारेबाजी शुरू कर दी। उसके बाद दोनों तरफ से झड़पें होने लगीं।”
वहीं, एक अन्य स्थानीय व्यक्ति ने बताया, “यह जश्न मनाने का तरीका नहीं था। मस्जिद के सामने ऐसा करना गलत था, लेकिन इसके जवाब में पत्थरबाजी भी नहीं होनी चाहिए थी। यह सब अचानक हुआ और किसी को कुछ समझ नहीं आया।”
राजनीतिक प्रतिक्रिया
इस घटना पर राजनीतिक प्रतिक्रियाएं भी आने लगी हैं। कांग्रेस नेता कमलनाथ ने इस घटना को प्रशासन की नाकामी बताया और कहा, “अगर पहले से सतर्कता बरती जाती तो यह हिंसा नहीं होती। प्रशासन की लापरवाही के कारण दो समुदायों के बीच तनाव बढ़ा है।”
वहीं, भाजपा नेता कैलाश विजयवर्गीय ने कहा, “कुछ असामाजिक तत्व माहौल खराब करने की कोशिश कर रहे हैं। सरकार दोषियों को बख्शेगी नहीं और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।”
महू में पहले भी हुई हैं ऐसी घटनाएं
महू में पहले भी सांप्रदायिक झड़पें हो चुकी हैं। बीते कुछ वर्षों में कई बार धार्मिक जुलूसों के दौरान विवाद हुए हैं, लेकिन प्रशासन ने हर बार स्थिति संभाल ली थी। इस बार मामला कुछ ज्यादा ही संवेदनशील हो गया, जिससे हिंसा भड़क उठी।
आगे क्या होगा?
प्रशासन अब घटना की पूरी जांच कर रहा है। पुलिस ने वीडियो फुटेज और चश्मदीदों के बयान जुटाने शुरू कर दिए हैं। दोषियों की पहचान कर उनके खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
महू के जिलाधिकारी ने कहा, “हम निष्पक्ष जांच कर रहे हैं। किसी भी निर्दोष को परेशान नहीं किया जाएगा और किसी भी दोषी को छोड़ा नहीं जाएगा।”
निष्कर्ष
महू में चैंपियंस ट्रॉफी की जीत का जश्न हिंसा में बदल गया, जिससे कई लोगों को नुकसान उठाना पड़ा। शहर काजी के बयान से यह साफ हुआ कि दोनों पक्षों ने हिंसा में हिस्सा लिया। प्रशासन अब स्थिति को नियंत्रित करने में जुटा है और दोषियों पर सख्त कार्रवाई की जा रही है।
ऐसी घटनाएं बताती हैं कि किसी भी खुशी के मौके को गलत तरीके से मनाने पर बड़े विवाद खड़े हो सकते हैं। सामाजिक सौहार्द बनाए रखना सभी नागरिकों की जिम्मेदारी है, ताकि भविष्य में इस तरह की घटनाएं न हों।